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गांवों में उच्च शिक्षा, भारतीय संस्कृति एवं वैदिक पद्धति के विकास के लिए तथा हमारी सभ्यता संस्कृति की आधारभूत संस्कृत एवं हिन्दी भाषा के विकास हेतु शिक्षण स्ंस्था की आवश्यकता का अनुभव करके डोहगी ग्राम के समीपस्थ नागरिकों ने सनातन – धर्म सभा का गठन करके उसके माध्यम से संस्कृत तथा हिन्दी पाठशाला की स्थापना 1928 में तत्कालीन कांगड़ा जनपद के अंतर्गत आने वाले गाँव डोहगी में की। वर्तमान में ऊना जनपद के बंगाणा तहसील के अंतर्गत डोहगी गाँव में यह महाविद्यालय उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर गतिमान है। सोलहश्रृडी श्रृंखला की तलहटी में विकसित यह महाविद्यालय संस्कृत की सेवा में उन्नत स्थान बनाए हुए है। हिन्दी भाषा के साथ-साथ ज्योतिष तथा कर्मकाण्ड की प्रारम्भिक शिक्षा के लिए यह पाठशाला सभी सनातनियों के हृदय में श्रद्धा का स्थान रहा है। स्थानीय नागरिकों ने अपनी भूमिदान करके सराहनीय योगदान किया। सर्वप्रथम यह संस्था पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से एफिलिएटेड थी। 1971 से हि0 प्र0 विश्वविद्यालय शिमला से सम्बद्धता स्थानान्तरित हुर्इ थी। 1966 से महाविद्यालय को हि0 प्र0 सरकार का वित्तीय अनुदान मार्च 1993 तक प्राप्त होता रहा। लगभग 10 वर्षों के निरन्तर प्रयत्नों के फलस्वरूप् प्रीसिपल डॉ0 भक्तवत्सल शर्मा के नेतृत्व में स्टॉफ की सेवाओं तथा ठाकुर रणजीत सिंह जी के प्रधानगी में सनातन-धर्म सभा के सदस्यों के सहयोग से भारत सरकार के आदर्श संस्कृत महाविद्यालयों की श्रेणी में यह महाविद्यालय अप्रैल 1993 में आ गया था। सम्प्रति इसका सच्चालन राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, मानित विश्वविद्यालय नर्इ दिल्ली के दिशा निर्देशन तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के वित्तपोषण में हो रहा है। जिसका प्रबन्ध एक उच्च स्तरीय प्रबन्ध समिति द्वारा होता है। जो आदर्श योजना में निर्दिष्ट नियमानुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार, राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, मानित विश्वविद्यालय नर्इ दिल्ली, हिमाचल प्रदेष शिक्षा विभाग, हि0 प्र0 विश्वविद्यालय एवं मातृसंस्थाके एक-एक सदस्य होते है। इस प्रबन्ध समिति का कार्यकारी अधिकारी के रूप में प्राचार्य सचिव का कार्य भी करते है। जो 39 वर्षो का शैक्षणिक अनुभव रखने वाले प्राचार्य प्रो0 भक्तवत्सल शर्मा पिछले 36 वर्षों से प्राचार्य के पद पर है। महाविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था गुणवत्ता अनुषासन एवं उत्तम प्रबन्धन के चलते प्रदेष के प्राय: सभी जिलों से छात्र एवं छात्राएं यहाँ के स्नातक परास्नातक शिक्षकों के अरिरिक्त अनके पदों पर भी कार्यरत है। इस महाविद्यालय में संस्कृत साहित्य, व्याकरण, दर्शन, ज्योतिष, वेदोनिषद, पुराण, न्याय शास्त्रादि पारम्परिक विद्यायें पढ़ाने वाले आचार्य सुदीर्घ अनुभवी एवं योग्य हैं। अंग्रेजी, हिन्दी, नागरिक शास्त्र आधुनिक विषयों की व्यव्स्था के कारण यहाँ से विशिष्ट शास्त्री (बी0 ए0 आनर्स विद् क्लासिक्स) की उपाधियाँ प्राप्त करने वालों की संख्या भी बहुतायत में है। साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, वेद आदि विषयों में आचार्य कक्षाएं चलाने का कार्य भी कम श्लाघनीय नहीं है। इन्हीं विशेशताओं के कारण यह महाविद्यालय उन्नति शिखर चूमने लगा है। विश्वास है, सभी स्टॉफ सदस्य अपने – अपने कार्यों का निर्वाह श्रद्धा एवं तत्परता से करते रहेंगे तो हम और भी सफलताएँ प्राप्त कर सकेंगे।

पाठ्यक्रम

आचार्य (एम0 ए0 समकक्ष):- हि0 प्र0 वि0 वि0 शिमला का यह द्वबर्षीय पाठयक्रम है।
शास्त्री(बी0ए0 समकक्ष):- राष्ट्रिय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा) के अन्तर्गत हि0 प्र0 वि0 वि0 शिमला के पाठ्यक्रम के अनुसार गतवर्श 2013 से शास्त्री का अध्ययन अब क्रमश: प्रथम षाण्मासिकी से षष्ठषाण्मासिक पर्यन्त होगा।
प्राक् शास्त्री(10+2 समकक्ष) यह द्विवर्षीय पाठ्यक्रम है, इसमें कुल 6 पत्र होते हैं।

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प्राचार्य

सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में आपका स्वागत है। यह संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में एक पूर्व प्रख्यात स्थान रखती है।

यह सबसे अच्छा संस्थान है जो स्नातक, विभिन्न संस्कृत विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए सुविधाएं प्रदान करना है।

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छात्रवृति

छात्रवृति के लिए समान्यरूप से पूर्व परीक्षा में निम्नानुसार प्राप्तांक विद्यार्थियों को राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान के द्वारा दी जाने वाली छात्रवृतियाँ सहायता के रूप में दी जाती है:
1. सामान्य वर्ग के छात्र (70%)
2. सामान्य वर्ग की छात्राएं (70%)
3. अनुसुचितजाति/ जनजाति के विद्यार्थी (70%)
4. अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी के लिए (70%)।

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